3 दिसंबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हुई हिंसा के दौरान शहीद हुए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के परिजनों ने आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लखनऊ में मुलाकात की. योगी आदित्यनाथ ने परिवार को दोषियों को सजा देने का आश्वासन दिया है. इस दौरान विधायक अतुल गर्ग और डीजीपी भी वहां मौजूद रहे. हिंसा के बाद आरोपियों की धरपकड़ जारी है, इस बीच यूपी सीएम ने बुधवार को कानून-व्यवस्था पर अधिकारियों के साथ बैठक की.
सरकार की तरफ से कहा गया है कि सुबोध कुमार सिंह का बड़ा बेटा सिविल सर्विस और छोटा बेटा वकालत की पढ़ाई कर रहा है. इनकी पढ़ाई में सरकार मदद करेगी. वहीं उनके क्षेत्र में सड़क का नाम सुबोध सिंह के नाम पर और उनके नाम पर ही कॉलेज बनाया जाएगा.
शहीद इंस्पेक्टर के परिवार को क्या मिला-
- एक सदस्य को नौकरी.
- दोनों बच्चों की कोचिंग में पुलिस विभाग की तरफ से मदद.
- परिवार को असाधारण पेंशन.
- एटा में जैथरा कुरावली सड़क का नाम सुबोध सिंह के नाम पर रखा जाएगा.
- बकाया 30 लाख के होम लोन को चुकाएगी योगी सरकार.
- पहले ही मुख्यमंत्री ने 50 लाख की राहत राशि की घोषणा कर दी थी.
CM योगी आदित्यनाथ ने बुलंदशहर की घटना में दिवंगत पुलिस इंस्पेक्टर की पत्नी को 40 लाख रुपये और माता-पिता को 10 लाख रुपये आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. इसके साथ ही उन्होंने दिवंगत इंस्पेक्टर के आश्रित परिवार को पेंशन तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी घोषणा की है.
गौरतलब है कि अभी तक इस मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार और 4 लोगों को हिरासत में लिया गया है. वहीं, घटना का मुख्य आरोपी बताया जा रहा योगेश राज अब भी फरार है. योगेश ने बुधवार को एक वीडियो जारी कर सफाई जारी की.
वीडियो में योगेश ने कहा है, "स्याना में हुई घटना में पुलिस उसे अपराधी बताने में तुली हुई है. जबकि वहां दो घटनाएं हुई थीं. पहली घटना स्याना के नजदीक एक गांव महाव में गोकशी को लेकर हुई थी, जिसकी सूचना पर मैं अपने साथियों के साथ पहुंचा था, प्रशासनिक लोग भी वहां पहुंचे थे. मामले को शांत करने के बाद हम सभी लोग स्याना थाने में अपना मुकदमा लिखवाने आ गए थे."
बैठक से योगी का सख्त संदेश
बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के डीएम और एसपी को गोकशी रोकने के सख्त निर्देश दिए हैं. साथ ही अगर किसी जिले में गोकशी की घटना पाई गई तो उसके लिए सीधे-सीधे जिले के एसपी और डीएम जिम्मेदार ठहराया जाएगा.
इस बात की जानकारी मुख्य सचिव ने उत्तर प्रदेश के सभी डीएम और एसपी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दी है, मुख्यमंत्री ने गोकशी पर अपना सख्त रुख मंगलवार रात की हुई मीटिंग में रखा था और हाई लेवल मीटिंग में उच्चाधिकारियों को गोकशी रोकने के साथ ही जिले के अधिकारियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराने के निर्देश दिए थे.
में कितना जानते हैं आप
Thursday, December 6, 2018
Thursday, November 29, 2018
पहले दिन 2.0 तोड़ देगी बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड
रजनीकांत और अक्षय कुमार की मुख्य भूमिकाओं से सजी "2.0" गुरुवार को रिलीज हो गई. इसका निर्देशन एस. शंकर ने किया है. करीबन 514 करोड़ के बजट में बनी 2.0, भारतीय बाजार में बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर नए कीर्तिमान बना सकती है.
ट्रेड एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मूवी का फर्स्ट डे कलेक्शन 100 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. इसके साथ ही यह फिल्म भारत में "ठग्स आॉफ हिंदोस्तान" के पहले दिन के कलेक्शन का रिकॉर्ड तोड़ सकती है. मालूम हो कि भारत में पहले दिन सबसे ज्यादा कलेक्शन का रिकॉर्ड अमिताभ बच्चन और आमिर खान की फिल्म के नाम है.
ठग्स ऑफ हिंदोस्तान ने पहले दिन 50 करोड़ से ज्यादा की कमाई की थी.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, हिंदी वर्जन से फिल्म की कमाई 20-25 करोड़ रहने का अनुमान है. अगर सभी भाषाओं की बात करें तो फिल्म पहले दिन 100 करोड़ के आंकड़े को छू सकती है.
HC ने दिए 12,000 वेबासाइट ब्लॉक करने के आदेश
उधर, फिल्म की रिलीज के साथ एक अच्छी खबर भी है. मद्रास हाईकोर्ट ने 37 इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISPs) को 12,000 वेबासाइट को ब्लॉक करने के आदेश दिए हैं. ये ऐसी वेबसाइट हैं जिन पर तमिल फिल्मों के पाइरेटेड वर्जन दिखाए जाते हैं. आदेश के बाद माना जा रहा है कि 2.0 लीक नहीं होगी और बड़े पैमाने पर दर्शक सिनेमा देखने थियेटर तक पहुंचेंगे.
फिल्म ने रिलीज से पहले बनाया रिकॉर्ड
फिल्म क्रिटिक रमेश बाला के मुताबिक फिल्म ने रिलीज से पहले ही एक अनोखा रिकॉर्ड बना लिया. ये रिकॉर्ड एडवांस बुकिंग के दौरान का है. 2.0 के 1.2 मिलियन टिकिट बिके हैं.
फिल्म में नेगेटिव किरदार में अक्षय
फिल्म में 2 बड़े स्टार हैं, रजनीकांत और अक्षय कुमार. पहली बार अक्षय साउथ की किसी फिल्म में काम कर रहे हैं. वो भी निगेटिव किरदार में. वे क्रोमैन लुक में दिखेंगे. ये गेटअप पाने के लिए उन्होंने हैवी मेकअप लिया है. ट्रेलर और पोस्टर में अक्षय का लुक काफी डरावना नजर आ रहा है.
ट्रेड एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मूवी का फर्स्ट डे कलेक्शन 100 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. इसके साथ ही यह फिल्म भारत में "ठग्स आॉफ हिंदोस्तान" के पहले दिन के कलेक्शन का रिकॉर्ड तोड़ सकती है. मालूम हो कि भारत में पहले दिन सबसे ज्यादा कलेक्शन का रिकॉर्ड अमिताभ बच्चन और आमिर खान की फिल्म के नाम है.
ठग्स ऑफ हिंदोस्तान ने पहले दिन 50 करोड़ से ज्यादा की कमाई की थी.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, हिंदी वर्जन से फिल्म की कमाई 20-25 करोड़ रहने का अनुमान है. अगर सभी भाषाओं की बात करें तो फिल्म पहले दिन 100 करोड़ के आंकड़े को छू सकती है.
HC ने दिए 12,000 वेबासाइट ब्लॉक करने के आदेश
उधर, फिल्म की रिलीज के साथ एक अच्छी खबर भी है. मद्रास हाईकोर्ट ने 37 इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISPs) को 12,000 वेबासाइट को ब्लॉक करने के आदेश दिए हैं. ये ऐसी वेबसाइट हैं जिन पर तमिल फिल्मों के पाइरेटेड वर्जन दिखाए जाते हैं. आदेश के बाद माना जा रहा है कि 2.0 लीक नहीं होगी और बड़े पैमाने पर दर्शक सिनेमा देखने थियेटर तक पहुंचेंगे.
फिल्म ने रिलीज से पहले बनाया रिकॉर्ड
फिल्म क्रिटिक रमेश बाला के मुताबिक फिल्म ने रिलीज से पहले ही एक अनोखा रिकॉर्ड बना लिया. ये रिकॉर्ड एडवांस बुकिंग के दौरान का है. 2.0 के 1.2 मिलियन टिकिट बिके हैं.
फिल्म में नेगेटिव किरदार में अक्षय
फिल्म में 2 बड़े स्टार हैं, रजनीकांत और अक्षय कुमार. पहली बार अक्षय साउथ की किसी फिल्म में काम कर रहे हैं. वो भी निगेटिव किरदार में. वे क्रोमैन लुक में दिखेंगे. ये गेटअप पाने के लिए उन्होंने हैवी मेकअप लिया है. ट्रेलर और पोस्टर में अक्षय का लुक काफी डरावना नजर आ रहा है.
Tuesday, October 30, 2018
सरदार पटेल के ख़ानदान के बारे में कितना जानते हैं आप?
अगर ये सच है तो ये जानकर कोई अचरज भी नहीं होता है. सरदार को भुलाने और सरदार के साथ हुए कथित अन्याय पर हायतौबा मचाने से जुड़ी राजनीति से गौतम पटेल दूर ही रहे हैं.
सरदार पटेल के नाम पर होने वाली राजनीति पर गौतम पटेल को हमेशा से ही आपत्ति रही है. सरदार पटेल भी अपने वारिसों को राजनीति से दूर रखना चाहते थे, ये भी जगजाहिर है.
सरदार पटेल ने ये कहा था कि जब तक वो दिल्ली में हैं, तब तक उनके रिश्तेदार दिल्ली में कदम न रखें.
लेकिन इसी बात को इतना बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया कि सरदार पटेल की मृत्यु के बाद उनकी संतानों के लंबे राजनीतिक जीवन को बिलकुल ही भुला दिया गया.
बहुत याद कराने पर शायद लोगों को ये याद आ जाए कि सरदार पटेल की बेटी मणि बेन ने साबरकांठा या मेहसाना से चुनाव लड़ा था.
सरदार पटेल एक कामयाब वकील थे और उन्होंने अपने बेटे और बेटी को अंग्रेज़ी माध्यम में शिक्षा दिलवाई थी.
पत्नी के असामयिक निधन के बाद दोनों संतानों को मुंबई में अंग्रेज़ गवर्नेस के पास छोड़कर वल्लभभाई पटेल बैरिस्टर बनने के लिए इंग्लैंड चले गए थे.
वहां से लौटने के बाद उनकी वकालत बहुत अच्छी चमक गई थी.
लेकिन महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह ने उन्हें सोचने को मजबूर कर दिया और इससे सरदार के जीवन की दिशा बदल गई.
धीरे-धीरे वो गांधी से जुड़े और अपना सबकुछ उन्होंने आंदोलन में झोंक दिया.
'मोदी के रास्ते का आख़िरी कांटा निकल चुका है'
मोदी सरकार और 600 फ़ुट का सरदार
डाया भाई पटेल
मणि बेन अपने सार्वजनिक जीवन में पिता के ही मार्ग पर चलती रहीं लेकिन उनके भाई डाया भाई ने अलग रास्ता चुना.
साल 1939 में पहली बार वो बॉम्बे म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के सदस्य के तौर पर चुने गए और वे 18 साल तक निगम के सदस्य बने रहे.
इसमें छह साल तक वे कांग्रेस के नेता के तौर पर रहे और 1944 में बॉम्बे के मेयर भी बने.
राष्ट्रीय राजनीति में डाया भाई का प्रवेश 1957 में होना था.
उन्होंने अपनी किताब की प्रस्तावना में लिखा है. "साल 1957 के चुनाव में कांग्रेस की तरफ़ से लोकसभा की सीट के लिए मैं चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं. इस सिलसिले में मैंने एक ख़त गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष को लिखा है. गुजरात प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख मुझसे मिलने के लिए मेरे घर आए थे और मुझे चुनाव लड़वाने के लिए आतुरता दिखाकर मुझे चिट्ठी लिखने को कहा."
लेकिन उसके बाद 1957 की जनवरी में इंदौर में हुए कांग्रेस अधिवेशन में डाया भाई को लगा पंडित नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस सरदार पटेल की विरासत को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. इसलिए उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी.
ये वो समय था जब महागुजरात आंदोलन ज़ोर पकड़ रहा था.
उन दिनों आगे रहने वाले नेताओं में इंदुलाल याग्निक और अन्य नेताओं ने मिलकर महागुजरात जनता परिषद के नाम से पार्टी बनाई थी.
इंदुलाल याग्निक ने डाया भाई से परिषद के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का आग्रह किया.
डाया भाई ने अपनी आत्मकथा में लिखा है, "मणि बेन ने नम आंखों से मुझसे कहा कि पिता जी की मौत हो गई है तो तुम कांग्रेस के ख़िलाफ़ कैसे चुनाव लड़ सकते हो."
सरदार पटेल के नाम पर होने वाली राजनीति पर गौतम पटेल को हमेशा से ही आपत्ति रही है. सरदार पटेल भी अपने वारिसों को राजनीति से दूर रखना चाहते थे, ये भी जगजाहिर है.
सरदार पटेल ने ये कहा था कि जब तक वो दिल्ली में हैं, तब तक उनके रिश्तेदार दिल्ली में कदम न रखें.
लेकिन इसी बात को इतना बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया कि सरदार पटेल की मृत्यु के बाद उनकी संतानों के लंबे राजनीतिक जीवन को बिलकुल ही भुला दिया गया.
बहुत याद कराने पर शायद लोगों को ये याद आ जाए कि सरदार पटेल की बेटी मणि बेन ने साबरकांठा या मेहसाना से चुनाव लड़ा था.
सरदार पटेल एक कामयाब वकील थे और उन्होंने अपने बेटे और बेटी को अंग्रेज़ी माध्यम में शिक्षा दिलवाई थी.
पत्नी के असामयिक निधन के बाद दोनों संतानों को मुंबई में अंग्रेज़ गवर्नेस के पास छोड़कर वल्लभभाई पटेल बैरिस्टर बनने के लिए इंग्लैंड चले गए थे.
वहां से लौटने के बाद उनकी वकालत बहुत अच्छी चमक गई थी.
लेकिन महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह ने उन्हें सोचने को मजबूर कर दिया और इससे सरदार के जीवन की दिशा बदल गई.
धीरे-धीरे वो गांधी से जुड़े और अपना सबकुछ उन्होंने आंदोलन में झोंक दिया.
'मोदी के रास्ते का आख़िरी कांटा निकल चुका है'
मोदी सरकार और 600 फ़ुट का सरदार
डाया भाई पटेल
मणि बेन अपने सार्वजनिक जीवन में पिता के ही मार्ग पर चलती रहीं लेकिन उनके भाई डाया भाई ने अलग रास्ता चुना.
साल 1939 में पहली बार वो बॉम्बे म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के सदस्य के तौर पर चुने गए और वे 18 साल तक निगम के सदस्य बने रहे.
इसमें छह साल तक वे कांग्रेस के नेता के तौर पर रहे और 1944 में बॉम्बे के मेयर भी बने.
राष्ट्रीय राजनीति में डाया भाई का प्रवेश 1957 में होना था.
उन्होंने अपनी किताब की प्रस्तावना में लिखा है. "साल 1957 के चुनाव में कांग्रेस की तरफ़ से लोकसभा की सीट के लिए मैं चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं. इस सिलसिले में मैंने एक ख़त गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष को लिखा है. गुजरात प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख मुझसे मिलने के लिए मेरे घर आए थे और मुझे चुनाव लड़वाने के लिए आतुरता दिखाकर मुझे चिट्ठी लिखने को कहा."
लेकिन उसके बाद 1957 की जनवरी में इंदौर में हुए कांग्रेस अधिवेशन में डाया भाई को लगा पंडित नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस सरदार पटेल की विरासत को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. इसलिए उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी.
ये वो समय था जब महागुजरात आंदोलन ज़ोर पकड़ रहा था.
उन दिनों आगे रहने वाले नेताओं में इंदुलाल याग्निक और अन्य नेताओं ने मिलकर महागुजरात जनता परिषद के नाम से पार्टी बनाई थी.
इंदुलाल याग्निक ने डाया भाई से परिषद के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का आग्रह किया.
डाया भाई ने अपनी आत्मकथा में लिखा है, "मणि बेन ने नम आंखों से मुझसे कहा कि पिता जी की मौत हो गई है तो तुम कांग्रेस के ख़िलाफ़ कैसे चुनाव लड़ सकते हो."
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